मीडिया को चोथा स्तम्भ कहा जाता है लेकिन क्या इस चोथे स्तम्भ को चोथे स्तम्भ का दर्जा दिया जा रहा है। नहीं। क्यों कानूनन मीडिया को चोथा स्तम्भ का दर्जा प्राप्त नहीं हो रहा। चोथा स्तम्भ जन जा रहा है, लेकिन मन नहीं जा रहा। क्यों।
हम पत्रकारों को मीडिया को कानूनन दर्जा दिलाने के प्रयाश करना चाहिए। सरकारी प्रावधान मैं मीडिया को चोथे स्तम्भ का दर्जा मिलना चाहिए। इसके लिए हम पत्रकारोंको ही प्रयाश करना पड़ेगा। अगर हम सरकारों के भरोशे बैठे रहे तो सरकारों का क्या आज ये तो कल वो। सरकारें बदलती रहेंगी लेकिन कोई सरकार हमारे बारे मैं नहीं सोचेगी। हमीं ख़ुद सोचना होगा।
धर्मेन्द्र तोमर, फ्रॉम पत्रकार Kahin
Wednesday, October 21, 2009
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