Tuesday, February 9, 2010
ग्वालियर के पत्रकारों की कलम को लगी जंग
ग्वालियर मैं पत्रकारों की कलम को जंग लग चुकी है। इसका जीता जागता उदाहरण अभी कुछ दिनों पहले सामने आया। बात कुछ यों थी की एक अखबार मैं क्राइम देखने वाले पत्रकार महोदय कि विगत दिनों एक थानेदार से झड़प हो गई। झड़प क्या मारा मारी हो गई। थानेदार ने पत्रकार महोदय से ये तक कह दिया कि तुम्हारा बजन बढ़ा दूंगा और पत्रकार महोदय कि गाडी ठाणे मैं बंद करवा दी।इतना सब होने के बाद भी ग्वालियर के कई पत्रकार सिर्फ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देने पहुंचे और वहां भी कुछ नहीं हुआ। आज भी वो थानेदार ड्यूटी पर है।धन्य है ऐसे पत्रकारों को और धन्य है ऐसी पत्रकरिता को।
ग्वालियर के पत्रकारों की कलम को लगी जंग
ग्वालियर मैं पत्रकारों की कलम को जंग लग चुकी है। इसका जीता जागता उदाहरण अभी कुछ दिनों पहले सामने आया। बात कुछ यों थी की एक अखबार मैं क्राइम देखने वाले पत्रकार महोदय कि विगत दिनों एक थानेदार से झड़प हो गई। झड़प क्या मारा मारी हो गई। थानेदार ने पत्रकार महोदय से ये तक कह दिया कि तुम्हारा बजन बढ़ा दूंगा और पत्रकार महोदय कि गाडी ठाणे मैं बंद करवा दी।
इतना सब होने के बाद भी ग्वालियर के कई पत्रकार सिर्फ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देने पहुंचे और वहां भी कुछ नहीं हुआ। आज भी वो थानेदार ड्यूटी पर है।
धन्य है ऐसे पत्रकारों को और धन्य है ऐसी पत्रकरिता को।
इतना सब होने के बाद भी ग्वालियर के कई पत्रकार सिर्फ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देने पहुंचे और वहां भी कुछ नहीं हुआ। आज भी वो थानेदार ड्यूटी पर है।
धन्य है ऐसे पत्रकारों को और धन्य है ऐसी पत्रकरिता को।
Wednesday, October 21, 2009
कोशिश करें Patrakar
मीडिया को चोथा स्तम्भ कहा जाता है लेकिन क्या इस चोथे स्तम्भ को चोथे स्तम्भ का दर्जा दिया जा रहा है। नहीं। क्यों कानूनन मीडिया को चोथा स्तम्भ का दर्जा प्राप्त नहीं हो रहा। चोथा स्तम्भ जन जा रहा है, लेकिन मन नहीं जा रहा। क्यों।
हम पत्रकारों को मीडिया को कानूनन दर्जा दिलाने के प्रयाश करना चाहिए। सरकारी प्रावधान मैं मीडिया को चोथे स्तम्भ का दर्जा मिलना चाहिए। इसके लिए हम पत्रकारोंको ही प्रयाश करना पड़ेगा। अगर हम सरकारों के भरोशे बैठे रहे तो सरकारों का क्या आज ये तो कल वो। सरकारें बदलती रहेंगी लेकिन कोई सरकार हमारे बारे मैं नहीं सोचेगी। हमीं ख़ुद सोचना होगा।
धर्मेन्द्र तोमर, फ्रॉम पत्रकार Kahin
हम पत्रकारों को मीडिया को कानूनन दर्जा दिलाने के प्रयाश करना चाहिए। सरकारी प्रावधान मैं मीडिया को चोथे स्तम्भ का दर्जा मिलना चाहिए। इसके लिए हम पत्रकारोंको ही प्रयाश करना पड़ेगा। अगर हम सरकारों के भरोशे बैठे रहे तो सरकारों का क्या आज ये तो कल वो। सरकारें बदलती रहेंगी लेकिन कोई सरकार हमारे बारे मैं नहीं सोचेगी। हमीं ख़ुद सोचना होगा।
धर्मेन्द्र तोमर, फ्रॉम पत्रकार Kahin
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